19 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन वृषभ राशि में चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण के दिन चंद्रमा कृतिका नक्षत्र में होगा, जिसके स्वामी ग्रह सूर्य हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण पूर्णिमा पर होता है। सूर्य और चंद्रमा के दो रहस्यमय ग्रह राहु और केतु के चपेट में आने पर चंद्र ग्रहण लगता है। ज्योतिषाचार्य नीरज धनखड़ के अनुसार, वैदिक ज्योतिष में, सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी पर हमारे जीवन का सार हैं। सूर्य हमारी आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा हमारे मन का कारक है।
खगोलीय दृष्टि से राहु और केतु, चंद्र नोड्स हैं और यह स्थिति तब बनाते हैं जब चंद्रमा का मार्ग राशि चक्र में सूर्य को पार करता है। राहु और केतु दोनों पिछले जीवन के साथ हमारे कर्म संबंधों को दर्शाते हैं। राहु हमारे मनोवैज्ञानिक रंग पिछली प्रवृत्तियों और हमारी असुरक्षाओं, भ्रम, भय, आघात और अवसाद को दर्शाता है। दूसरी ओर केतु आध्यात्मिकता परिवर्तन का ग्रह है। यह इच्छाहीन है और हमें सभी प्रकार की भावनाओं से अलग कर देता है।
ग्रहण अक्सर हमारे जीवन में नई शुरुआत और अवसर लाते हैं और अचानक रुकावटों का कारण भी बनता है। ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण राशियों में जोड़े के रूप में 18 से 24 महीने तक के लिए होता है, जब तक वे इस चक्र को पूरा नहीं कर लेते। सभी राशियों से च्रक पूरा होने के बाद ग्रहण करीब 19 साल की अवधि में वापस अपनी उसी डिग्री और राशि में आ जाता है।
इन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव-
19 नवंबर का चंद्र ग्रहण वृषभ और वृश्चिक राशियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा। क्योंकि ग्रहण के दिन चंद्रमा वृषभ राशि में राहु के साथ और सूर्य वृश्चिक में केतु के साथ स्थित होगा। इस दौरान इन राशि वालों को अप्रत्याशित घटनाओं के लिए खुद को तैयार करना होगा और अचानक बदलाव, जो उन्हें उनके आराम क्षेत्र से बाहर निकाल सकते हैं।
इसी तरह, सिंह राशि के लोग भी अपनी भावनात्मक ऊर्जा से बाहर निकलने का अनुभव करेंगे। क्योंकि ग्रहण के दिन चंद्रमा सूर्य के नक्षत्र में होगा। ऐसे में आपको कुछ अप्रत्याशित घटनाक्रम का सामना करना पड़ सकता है।
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